हां मेरे झूठ के खरीदार बहुत हैं।
सुना है शहर में बाज़ार बहुत है।।
नाखुदा नाहक ही डराता है हमें।
क्या दरिया में मंझधार बहुत हैं।।
-यूनुस खान
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