बेरहम इश्क़ दिल का मुश्क़ दे जाता है ,
तन्हाइयो को सोचने की तमाम वजह दे जाता है |
हर समय सनम का इख्तियार रहता है,
चश्म-ए-चिरागो को इन्त्ज़ार रहता है |
दिल-ए-विरानियाँ महफ़िलों में भारी पड़ जाती है
सारे जहाँ की सुकूनियत दिल को नही भाती है |
दीदार-ए-हुस्न की हर वखत तलब होती है,
हर राह मे सनम की आहट लगती है |
तक़्दीर की रिफ़ायत ने तुम्हे हमारा बना दिया,
गर ना मिले तब दिल-ए- आरज़ू बेशुमार होगी |
युक्ति वार्ष्णेय "सरला"
मुरादाबाद
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