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डियर पापा

                
                                                         
                            आपकी उंगली जब से छूटी है, मानो सारी दुनिया ही रूठ गई है;
                                                                 
                            
वो नादान सी लड़की पता नहीं कब इतनी बड़ी हो गई है।
ज़िद पर अड़ कर मनवा लेती थी अपनी हर बात,
आपके जाने के बाद मानो सब्र की कठपुतली बन गई है।
आँखों में थे जिसके सपने बेशुमार,
अब वही आँखें अक्सर भीगी रहने लगी हैं।
जिसपे गुरूर था सबको बेहिसाब,
अब वही लड़की सबको खटकने लगी है।
आप थे तो लगता था दुनिया की सारी खुशियाँ हैं हमारे आँगन में,
आपके जाने के बाद तो हमें घर की छत भी अपनी नहीं लगी है।
आपकी उंगली क्या छूटी पापा,
आपकी बेटी की तो दुनिया ही बिखर गई है।
-माधवी अलवर 
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51 मिनट पहले

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