ये वीर भूमि गौरवशाली,
वीरों का यहाँ खजाना है।
तुम टिक न सकोगे दो पल भी,
ये वीर विजय दीवाना है।।
आती है बात जब गरिमा की,
तो ये शेर दहाड़े भरते है।।
उड़ आसमान,फौलादी सीना,
अरि मुंह तोपों से बरते है।।
तुम एक मिटाओगे सिंदूर यहाँ,
हम हर जगह सिंदूर वहाएँगे।।
अरि की भूमि के कण कण में,
हम रक्त सिंदूर भर आएंगे।।
तुम भूल गए भारत की गरिमा,
जो बाज़ समान उड़ान भरे।।
पल झपके तुझे उड़ा दे गगन,
रण भूमि में जा कर गटके।।
ओ सभल पाक औक़ात में रह,
तुझे छटी की याद दिलाता हूं।।
तेरे एयर वेस जिहादी दुनिया,
को मिट्टी में आज मिलाता हूं।।
कर आये बाँकुरे लंका दहन,
रोना अब अपनी करनी पर।।
हो सके अभी भी संभल पाक,
तू सौप दे जिहादियों का घर।।
यदि तू इनका रखवाला बन,
आएगा भारत माँ की भूमि पर।।
खुद को मिट्टी फिर दफन समझ,
मुँहखी खाये इस करनी पर।।
ये मातृ भूमि पावन भारत की,
हर कौम यहां की सैनिक है।।
तुम दूर रहो इस रज कण से,
बरना बर्वादी ये तेरी निश्चित है।।
-आचार्य रामानुज अवस्थी
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