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ये जंग

                
                                                         
                            ये जंग कितने दिन बुरी खबर सुनाएगी ,
                                                                 
                            
ये जंग कितनों को कबर में सुलाएगी।

दरके-दरके घर शहरों में
सहमें-सहमें लोग घरों में,
न जाने किस पल छप्पर इनके उड़ाएगी,
ये जंग कितनों को कबर में सुलाएगी।

खरीद सकते हैं मगर सामान नहीं
कहाँ से लाये खुली कोई दुकान नहीं ,
न जाने कब तक लोगों को तरसाएगी ,
ये जंग कितनों को कब्र में सुलाएगी।

कितनों की गोद और सुहाग उजड़ेगा
कितने बच्चों का भाग्य बिगड़ेगा ,
दुनिया जंग की गुत्थी कब सुलझाएगी ,
ये जंग कितनों को कबर में सुलाएगी।

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4 वर्ष पहले

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