आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरे देश के नेता

                
                                                         
                            मुझको बस रावण दिखता है
                                                                 
                            
नेताओ के वेश में
जो सदा जलता रहता है
ईर्ष्या और द्वेष में

ना जनता के दिल जीतने
नेक कार्य की आशा से
इनको है बस भीड़ जुटानी
राजनीति की भाषा से

ये न्याय के दाता बनकर
संसद में दंगा करते है
काले धन से झोली भरकर
निर्धन को नंगा करते है

ये स्वर्ण के महल में रहकर
धर्म का धंधा करते है
जो इनको है आंख दिखाते
उन सबको अंधा करते है

न जाने कब देश मे मेरे
ऐसा शासन आएगा
जब देश का हर एक नेता
सत्यनिष्ठ बन जायेगा

उस दिन सबको राम दिखेंगे
नेताओ के वेश में
जो सदा पूजे जाएंगे
राज्य देश विदेश में

- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर