सपनों सा ख़्वाब है ज़िन्दगी, हकीकत भी है ज़िन्दगी,
फिल्मों की कहानी की तरह, रंगीन है ज़िन्दगी।
हँसना भी है ज़िन्दगी, रोना भी है ज़िन्दगी,
चलना भी है ज़िन्दगी, गिरना भी है ज़िन्दगी।
गिर-गिर कर फिर से उठना भी है ज़िन्दगी,
जीतने की जिद रखना भी है ज़िन्दगी।
हार के बाद फिर से जीतने की कोशिश करना,
कभी पछताना, कभी खुद से टकराना- यही है ज़िन्दगी।
बचपन की तरह बिना किसी चिंता के जीना,
वह मासूमियत, वह चंचलता- यही है ज़िन्दगी।
माता-पिता के साथ बिताया हर अनमोल पल,
उन्हें खोने के बाद भी, उनके बिना जीना- यही है ज़िन्दगी।
ऐ मौत, रुक जा, अभी तो मुझमें जीने का इरादा है,
इस चाह को जीते रहना- यही है ज़िन्दगी।
कभी जब दुखों का ग़म हो और मन थक जाए,
और मन जब मौत को बुलाए, वह नज़ारा देखना- यही है ज़िन्दगी।
मैं न समझ सका तुझे, ऐ ज़िन्दगी,
तू ही बता, आखिर तू है क्या, ऐ ज़िन्दगी।
-यादवेन्द्र सिंह
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