हारता वही है, जिसने कोशिश नहीं की,
क्यों कि कोशिश करने वालों कि कभी हार नहीं होती।
हार तभी होती है, जब मान ली जाती है,
और जीत तभी होती है, जब ठान ली जाती है।
पहला कदम रखा तो गिर पड़ा ज़रूर,
पर हर गिरावट ने सिखाया, चलना है जरूर।
गिरा, उठा, फिर गिरा, फिर संभला,
थका नहीं, रुका नहीं, अपने कदम बढ़ाते चला।
अनुभव के निशान बनाते चला,
हर ठोकर को नई राह बनाते चला।
क्योंकि जीतेंगे हम — बस एक कोशिश और...
जब दसवीं में असफल हुआ, मन टूटा,
माता-पिता की उम्मीदों का दीपक कुछ झूला।
पर भीतर की आग ने कहा, हारना नहीं,
लक्ष्य ठाना, मेहनत की, रुका कहीं नहीं।
इस बार परीक्षा ने मुस्कुराकर उत्तर दिया,
मेहनत ने फल दिया, विश्वास ने चमत्कार किया।
अव्वल आया, सपने पूरे हुए,
माता-पिता की आँखों में गर्व के दीप जले नए।
क्योंकि जीतेंगे हम — बस एक कोशिश और...
चलो कदम ऐसे कि राहें पहचान लें,
करो काम ऐसा कि दुनिया नाम जान ले।
ना टूटे हिम्मत, ना थमे सफ़र,
इरादे हों लोहे से भी मजबूत और बेहतर।
मंज़िल मिले या ना मिले, ये तो किस्मत की बात,
पर कोशिश न करना, यही सबसे बड़ी मात।
किनारे खड़े रहोगे तो लहरें नहीं आएँगी,
चल पड़ो, संघर्ष करो, मंज़िल ख़ुद झुक जाएगी।
क्योंकि जीतेंगे हम — बस एक कोशिश और...
-यादवेन्द्र सिंह
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