रौनक न था चेहरा पर जॉन एलिया कि लेकिन शायरी दिलकश थे
मोहब्बत करने की काबिल न थे मगर उन्हें मरना भी पसंद न था हरगिज़
शायरी में खुदा को ललकारते थे शान से लेकिन दिल मे रहता था
मर्दानगी शक्ती में कमी थी जोश में कोई कमी न था जॉन एलिया को
कुछ मुसलमान उन्हें मुलहिद समझते थे हमने उन्हें आजमाइशें खुदा समझा है
हम कहते हैं कि जॉन एलिया को समझना सभी केलिए आसान न था वसी ।
- वसी अहमद क़ादरी
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