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अल्फाज़ ए तसव्वुर,,,,,

                
                                                         
                            वो मुझे छोड़ गया, ये कमाल है उसका,
                                                                 
                            
हाय भी दिल में मगर कुछ ख़याल है उसका।
राह तकते हुए गुज़री हैं कई शाम मेरी,
अब भी हर याद में बाकी मलाल है उसका।
शब-ए-हिज्राँ में मेरी आँख को नींद आई नहीं,
दिल को हर पल रहता ख़याल है उसका।
कूचा-ए-यार से निकले तो ये जाना हमने,
हर क़दम साथ चला दर्द-ए-विसाल है उसका।
सहर आई तो मगर दिल की सियाही न गई,
चश्म-ए-नम में अभी तक वही साल है उसका।
-वकील अहमद रज़ा
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6 घंटे पहले

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