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बनारस बाढ़ में

                
                                                         
                            अखबारों में छपी है ढेर सारी तस्वीरें
                                                                 
                            
खबरों सहित
घुटने और कमर तक पानी में,
नाव से बस्ती राहत सामग्री
बाढ़ शिविरों में मुस्कराते
समाजसेवी व राजनेता
टूट गये है गंगाघाटें के
आपस के संपर्क और संबंध
ऊपर की ओर सरक औ सिमट गये है
सुबहे बनारस और गंगा आरती स्थल
पहुंच गई है वरुणा उन इलाकों में
जिन्हे वह बहुत पहले छोड़ आई थी
बहुत सी आँखों मे सवाल दिखते है
डूब क्षेत्र में घर बनाने को किसने कहा था
तब नगर निगम और विकास प्राधिकरण कहाँ थे
क्यों परेशान होते हैं लोग हर साल
सब कुछ जान बूझ कर भी
पर मै देख रहा हूं
घर के आंगन मे आये बाढ़ के पानी में
अपनी देहरी पर आरती करती
घाट के ठीक ऊपर रहने वाली
मां गंगा और काशी की आस्थावान
बुढी माई को
जिसके लिये बाढ़ विभिषिका नही
गंगा मैया का शुभागमन है
उसके छोटे से पुराने घर में
बाढ़ के इन दोनो दृश्यों को देख
मै हैरान परेशान हूं
सच और सत के मध्य
रेखा परिभाषित करने में
आस्था और विभिषिका
दो रुप है सोच के
शिव के उग्र व कल्याण के
प्रश्न हम से है
उत्तर भी हमी से
काशी के विविध रंग में
हमारी समस्याओ और
हमारी आस्था के.....
-व्योमेश चित्रवंश
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6 घंटे पहले

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