ख़ुद से नज़रें अगर मिला लो
तो बस मिलने आ जाना
दिल को दिलासा अगर दिला लो
तो बस मिलने आ जाना
अपने गलत फैसलों की जो
सज़ा मुझे दिलवाई है
तेरी साज़ाएं पूरी कर लूं
तो बस मिलने आ जाना
दिल ज़मीर सब बेच चुका हूं
तेरा मोल चुकाने को
जब मेरा मोल पता चल जाए
तो बस मिलने आ जाना
कहां की कसमें , कौन से वादे
कहां तुझे कुछ याद रहा
जब याद मेरी कुछ याद दिलाए
तो बस मिलने आ जाना
जिन चीजों की कीमत तुझको
आज मेरे ऊपर लगती है
उनका मोल पता चल जाए
तो बस मिलने आ जाना
अपने वादे भूल भले तू
मैं तो सारे याद रखूंगा
जब जब धूप लगेगी तुझको
बादल बन के साथ दिखूंगा
जब मेरी बारिश आंसू धो दे
तो बस मिलने आ जाना
स्वर्ण नहीं हैं पीले पत्थर
कौन तुझे समझाए अब
जब कंकड़-पत्थर खेल चुकी हो
तो बस मिलने आ जाना
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