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अब लहज़ा न्याय का बदलने लगा है

                
                                                         
                            सच और झूठ मे फ़र्क करता है
                                                                 
                            
पुरानी नजीरों से हर्फ़ लिखता है!

तमाम मसले आते है अदालत मे
मुताबिक़ क़ानून इंसाफ़ करता है!

वक़्त लगता है तारीख़ बढ़ती है
सबूत-ओ-दलील से जीत होती है!

अब लहज़ा न्याय का बदलने लगा है
वज़ह यूँ रुसवाइयाँ बढ़ने लगा है!

अमीरों की ताक़त गरीबों के आँसू
ख़ुद न्याय यूँ 'विवेक' घिरने लगा है!
-विवेक जौनपुरी
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1 day ago

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