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मेरे अल्फाज़

सोशल मीडिया एक काल्पनिक दुनिया

VISHAL YADAV

3 कविताएं

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वाट्सअप,फेसबुक और ट्विटर
इत्यादि की जो बाते हैं
क्या कभी काम ये आते हैं
मै कहता इसको गलत नहीं
कुछ हद तक तो यह है सही
पर इसमें इतना लीन हो जाना
मानो बुद्धिहीन हो जाना
इन काल्पनिक दुनिया में
तुम क्यो हो घर बसाये हुए
कुछ याद भी है
कितने अरसे बीत गए,तुम्हे
माॅ को गले लगाये हुए
मुझे पता है,हो मजबूर नहीं
उस माॅ से उतनी भी दूर नहीं
कि पास उनके ना जा सको
कुछ उनके दिल की बात सुनो
कुछ अपनी भी सुना सको
फिर क्यो?
इस भीड़ भरी दुनिया में
तुम तन्हा तन्हा रहते हो
हो अपनो के साथ भले,पर
बेगानो सा लगते हो
आंखो पे ग्लास हाथों में वाच
वाह! क्या जचते हो
दिखते तो स्मार्ट भले,पर
खुद ही खुद को ठगते हो


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