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कण कण में तुम

                
                                                         
                            तुम गंगा की निर्मल धार हो ,
                                                                 
                            
तुम मेरे मन की हर बात हो,
तुम मेरे चेहरे की मुस्कुराहट हो,
तुम रात हो, चांदनी रात हो,
तुम वसंत की सुगंधित बयार हो,
तुम श्रावण की मनोरम बौछार हो,
तुम वीणावादिनी की वीणा की सुरीली आवाज हो,
तुम नन्हे से बालक की खिलखिलाहट हो,
तुम नींद हो मेरी,
तुम मेरे ख्वाब हो, सच कहूं तो हे लाड़ली किशोरी,
तुम मेरे प्राण हो॥

-विशाल कुमार वर्मा
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1 hour ago

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