यह मयंक सा मुखड़ा कितना प्यारा लगता है, यह विषाद से भरे बादलों में सुधा सा लगता है।
पूरी दुनिया कुर्बान है तेरे इस नन्हे से चेहरे पर, जब-जब देखता हूँ, राधा और कृष्ण की छवि दिखती है इस आनन पर।
सूखी बगिया को चमन कर दे तेरी एक मुस्कान, मरते हुए को भी ज़िंदा कर दे तेरी यह मुस्कान।
ब्रह्मा भी नतमस्तक हैं तेरी इस मुस्कान पर, मैं और कितना लिखूँ, जितना लिखूँ उतना ही कम है तेरी इस
-विशाल वर्मा
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