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मौसम की अंगड़ाई

                
                                                         
                            करवट बदली है
                                                                 
                            
मौसम ने,और ली है
एक अंगड़ाई।
उमस भरी गर्मी
से राहत,है जन जन
तक पहुंचाई।

गर्मी से बारिश
का मौसम,बदल
रहा है अब पल पल।
प्यास बुझाने,शुष्क
धरा की, बादल
लेकर आते हैं जल।

इस बारिश के
मौसम मेंअब, होगा
लुका छुपी का खेल।
सूरज और बादल
मिलजुल कर,खेलेंगे
बर्षा का खेल।

लाते बादल भर भर
पानी,और बर्षा
कर वापस जाते।
देकर धरती को
बर्षा जल,तृप्ति धरा
को हैं पहुंचाते।

घिर घिर के घनघोर
घटाएं, लाते बादल
अपने साथ।
छुपता सूरज,
दूर कहीं जा,लगा
हो गई दिन में रात।

लुका छुपी के
इसी खेल में,निकला
सूरज चमकी धूप।
पीछे से फिर झुंड में
बादल,आ पहुंचे
धरे, अनेकों रुप।

"गुरु जी" हरियाली है
जल से पोषित,जल
से होती जीव सुरक्षा।
कर संरक्षण इस
जल का सब,करें
सुनिश्चित जीवन रक्षा।

वीरेन्द्र कुमार
नई दिल्ली
 
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4 वर्ष पहले

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