मैं जानता हूँ, आप मुझे, गिरने नहीं दोगे
आप मुझे अकेले कभी, चलने नहीं दोगे।
मैंने छुई हैं बुलंदियाँ, और छूता ही रहूँगा
आप मेरा 'सूरज' कभी, ढलने नहीं दोगे।
-विनोद कुमार "विनय"
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