क्षण ही बड़ा जगत में राही
क्षण ही रचे संसार है
क्षण में होती सृजन ये धरती
क्षण में होती प्रलय है
क्षण में निर्णय प्रियवर लेते
क्षण में बसे घरद्वार है
क्षण क्षण खटते माता पिता
क्षण में बसे परिवार है
क्षण में मिलता मानव जीवन
क्षण में हुए जवान है
क्षण क्षण होता क्षय शरीर
न क्षण में कटे बुढापा है
-विनोद यादव 'शहीद'
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