उठा है घर से बाहर
जब उसका कदम
बहारों ने घर का
रस्ता छोड़ दिया है
कमीज़ में लगा जब से
रिश्वत का खीसा
मक़ाम बरक़त ने
घर का छोड़ दिया है
नए घर में जब न
रहा माँ के लिये कोना
पत्तों ने बारीश से
बचाना छोड़ दिया है
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