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विदुषी शिक्षिका

                
                                                         
                            इंदु मैम हैं सबसे प्यारी,
                                                                 
                            
जैसे चाँदनी उजली न्यारी |
हिन्दी का ज्ञान वे दिलवाएं,
भाषा को सुन्दर बनवाएँ ||

शब्दों की वे माला गूँथे,
भावों का संसार दिखाएँ |
कविता, कहानी, दोहे सुन्दर,
हँसते-हँसते याद कराएँ ||

उनकी वाणी मीठी लगती,
जैसे कोयल बोले वन में |
कठिन पाठ भी सरल
बनाकर, समझाएँ वे हर क्षण में ||

वर्णमाला से व्याकरण तक,
सब कुछ साफ सिखाती हैं।
गलती होने पर भी हमको,
प्यार से राह दिखाती हैं ||

मुहावरे और लोकोक्तियाँ,
बड़े सरल ढंग से बतलाएँ |
निबंध, पत्र और भाषण भी,
सुन्दर शैली में लिखवाएँ ||

मंच पर जब हम हैं बोलते,
आत्मविश्वास बढ़ जाता है।
उनकी दी हुई शिक्षा से,
जीवन पथ जगमगाता है।।

हिन्दी केवल भाषा नहीं,
यह हमारी संस्कृति की शान है।
भारत माँ की पावन वाणी,
हम सबकी पहचान है।

मैं अभिषेक उनका विद्यार्थी,
गर्व से शीश झुकाता हूँ।
उनकी सिखाई हर एक शिक्षा,
दिल से सदा अपनाता हूँ।।

उनका स्नेह अपार है,
जैसे सागर गहरा हो।
उनके चरणों में है ज्ञान,
जैसे मंदिर में सवेरा हो।।

मैंम आप सदा मुस्काएं,
आपके जीवन में खुशियाँ आएँ।
आपका नाम सदा ऊँचा हो,
हम सब मिलकर गुनगाएँ।।
-अभिषेक गुप्ता 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

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