तू ख़ुद को यूँ ही ज़ाया मत होने दे,
तू लड़ अपने हक़ के लिए।
तू चल, दौड़ और गिर भी—पर रुक मत।
माना मंज़िल अभी कोसों दूर है,
लेकिन मंज़िल मिलेगी तुझे भी एक दिन।
तू बस हिम्मत मत हार,
क्योंकि असली योद्धा जग से लड़कर ही बनते हैं।
सूरज-सा तेज़ है तू—ये ठान ले, ये मान ले।
जाना है शिखर पर तुझे,
सच कर दिखाने हैं वो सारे ख़्वाब,
जो तूने बरसों से संजोकर रखे थे।
तू ख़ुद को यूँ ही ज़ाया मत होने दे।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X