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चंद लम्हों की ख़ामोशी

                
                                                         
                            ख़ामोश हूं मैं आज दुनिया की आहट सुन कर..
                                                                 
                            
दूर जाना चाहतीं हूं मैं लोगों की भीड़ से..
खुद को खो देना चाहतीं हूं मैं लोगों की भीड़ में..
ओड़ लिया है नकाब मैंने आज दुनिया की नजरों में गुम हो जाने को फिर क्यों ये साये पीछा करते हैं,
खुद को दरकिनार कर आज एक बार फिर बिखरना चाहतीं हूं
फिर क्यों ये रास्ते मुझे वापस उसी राह पर ले जाते हैं..
दिल के दरवाज़े मैंने कब से बंद कर दिये
थक जाती हूं मैं लोगों को अक्सर ये समझाते हुए की, मैं आज कुछ देर और ख़ामोश रहना चाहतीं हूं....

 
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45 मिनट पहले

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