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अजनबी रास्ता

                
                                                         
                            किसी रास्ते जो तुम मिलो मुझे, वहाँ जहाँ सभी रास्ते आकर ख़त्म हो जाते हैं।
                                                                 
                            
जहाँ न तुमसे दूर हो जाने का ग़म सताता है, न ही कोई मुझसे यह कह पाता है कि मुझे जाने कहाँ ले जाएगा यह रास्ता।
जाना तो मुझे मेरी मंज़िल तक था, पर कहाँ... हर किसी की मंज़िल यहाँ आकर ख़त्म होती है।
रास्ता तो कोसों दूर निकल गया, पर मेरा ज़मीर तो वहीं ठहर गया, जहाँ मैं अपने दिल का एक टुकड़ा छोड़ आई,
जो न धड़कनों के साथ धड़क पाया, और न ही मुकम्मल हो सका।
किसी दिन मुड़कर देखा मैंने, तो पाया कि मैं किसी नए शहर में बसने आ गई थी, और वह टुकड़ा भी मेरे साथ चला आया।
फिर न तो कुछ पाने की कोई तलब रही, और न ही किसी से बिछड़ जाने का कोई अफ़सोस,
तब मुझे एहसास हुआ कि यह ख़ुदा का कोई करिश्मा है, जो मेरी रूह से इस क़दर लिपटा हुआ सा है कि हर पल, हर साँस, मेरे साथ रहता है।
यह वही रास्ता है जो सीधा मेरे दिल से गुज़रता हुआ मेरी मंज़िल तक पहुँचता है।
यह रास्ता मुझे इतला करता है कि मेरा सफ़र अब बस यहीं तक था।
पर कहते हैं न-राहें हमें हमारी मंज़िल तक पहुँचाती हैं, लेकिन यह वह रास्ता है जो ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेता।

 
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एक घंटा पहले

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