मौन रुदन छिपा हर दृग में और अंतस में है ज्वाला
जिनकी सूनी मांगों से ये दहल गई पूरी हाला
ऑपरेशन सिंदूर किया अरि मंसूबों को खाक किया
सर पर बाँध कफन अपने इतिहास ये स्वर्णिम रच डाला
आतंकी ठिकानों पर हमला यह पुरजोर किया
मिलकर तीनों सेनाओं ने गर्जन एक घनघोर किया
नहीं मकसद आतंक फैलाना पाक को धूल चटानी थी
रणनीतिक सैन्य अभियान ने शत्रु को झकझोर दिया
पाक यह कैसे भूल गया भारत वीरों की अवनी है
यहां फूल नहीं अंगारे हैं माता शेरों की जननी है
आज पुनः पूरी ताकत से दुश्मन को ललकारा है
दे शिकस्त प्रतिपक्ष को, किया कलेजा छलनी है
-विनीता चौरासिया
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X