की गई जब मेहनत हो तो कुछ बेकार नहीं होगा।
यहॉं किसी का बिना किए ही कुछ सत्कार नहीं होगा।
खुली हथेली होगी तब ही कुछ हासिल कर पाओगे।
बंद रहेंगी मुट्ठी तो फिर चमत्कार नहीं होगा।।
हुई किसी की कृपा भी हो तो कुछ आधार नहीं होगा।
करे न खुद तो कहीं किसी का कुछ उपकार नहीं होगा।
इच्छा तो ऐसी कि जा के आसमान भेदित कर दूँ।
भेदित ही करना होगा यहॉं चमत्कार नहीं होगा।।
-----विनीत चतुर्वेदी 'विलक्षण'
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