क्यों चीन की बात हो,क्यों पाकिस्तान की बात हो।
क्यों राम की बात हो ,क्यों रहमान की बात हो।
क्यों गीता की बात हो, क्यों कुरान की बात हो।
क्यों हिन्दू की बात हो,क्यों मुसलमान की बात हो।
अब शिक्षा की बात हो,और सविंधान की बात हो।
भारत मे रहने वाले, हर इंसान की बात हो।
रोटी कपड़ा शिक्षा और ,मकान की बात हो।
बेरोजगार बैठे भारत के, नौजवान की बात हो।
सीमा पे डटे हुए मेरे,वीर जवान की बात हो।
कर्ज़ से दबे हुए मेरे ,हर किसान की बात हो।
बचे लाज बेटियों की,उस ईमान की बात हो।
जान से भी ज्यादा प्यारे, भारत महान की बात हो।
जय हिंद ,जय भारत
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X