शिक्षा को हथियार बनाओ , टूट पड़ो ।
उठो धरा के जीवाओं , तुम टूट पड़ो ।।
क्या नहीं हुआ, ये सोच व्यर्थ न टूटो तुम,
इंद्र बनो ,और बज्र सा टूट पड़ो ।।
उठो रात की सभी कलाओं ,साथ निभाओ।
हार जीत के बीच श्रम का पौध लगाओ ।।
सींचो उसको जबतक उसमें फल न लगे,
पढ़ो समय की चाल, समय पर टूट पड़ो ।।
लहरें जोड़ो साथ अनल के ,नदी बनो ।
बहते जाओ और जलधि में टूट पड़ो ।।
लक्ष्य अभी ना मिला, न पग को रोको तुम ,
मत रुको किसी के लिए धरा पर टूट पड़ो ।।
नहीं मिलेगा लक्ष्य हताशा कहती है ,
तोड़ो भ्रम और लक्ष्य साध कर टूट पड़ो ।।
-मानव भट्ट
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