जो ख़ुद न हो सका मेरा, वो प्यार क्या लौटाएगा,
जो थाम चुका है किसी और का हाथ, वो इकरार क्या लौटाएगा।
जिसे रास आ गई है किसी और की महफ़िल,
वो मेरे हिस्से का अब इंतज़ार क्या लौटाएगा।
मैंने तो उसके नाम पे हर ख़ुशी लुटा दी,
वो मेरी आँखों का खोया करार क्या लौटाएगा।
जिसे मेरी वफ़ाओं की कभी क़दर ही न थी,
वो मेरे दिल का बीता खुमार क्या लौटाएगा।
वो छोड़कर गया है मुझे राह के बीच में,
वो मेरी ज़िंदगी का फिर बहार क्या लौटाएगा।
विक्की, जो बदल चुका है मौसम की तरह अब,
वो बीते हुए लम्हों का प्यार क्या लौटाएगा।
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