कान्हा जी के श्री चरणों में सादर नमन है,
जो सभी के दुःख हर लें, ऐसे हमारे भगवान श्रीकृष्ण हैं।
मथुरा की पावन धरती पर जन्मा शुभ क्षण है,
देवकी के लाल के आने से धन्य हुआ हर जन है।
नंद के घर आनंद छाया, गूँज उठा आँगन है,
नन्हे कान्हा के चरण पड़े तो पावन हुआ गोकुल-धाम है।
माखन चुराकर मन हर लेना, कान्हा की प्यारी अदा है,
मुरली की मधुर तान पर झूम उठा सारा बृज है।
राधा के मनमोहन हैं, प्रेम की सुंदर मिसाल हैं,
गोपियों के प्राण और भक्तों के रखवाले नंदलाल हैं।
कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया है,
कर्म और धर्म की राह पर चलना सिखाया है।
जब-जब धरती पर बढ़ता अधर्म और अत्याचार है,
तब-तब कृष्ण का अवतार ही धर्म का आधार है।
जिसके नाम-स्मरण से मिट जाता मन का संताप है,
जिसकी भक्ति में मिल जाता जीवन को सच्चा प्रताप है।
दीन-दुखियों के सहारे, सबके पालनहार हैं,
जिनके चरणों में सच्चा प्रेम, वही मेरे सरकार हैं।
कान्हा जी के श्री चरणों में सादर नमन है,
जो सभी के दुःख हर लें, ऐसे हमारे भगवान श्रीकृष्ण हैं।
आप सभी शिक्षक भाई-बहनों, इष्ट-मित्रों एवं शुभचिंतकों को
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक मंगलकामनाएँ।
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