एक पिता ने बड़े गर्व से अपनी बेटी को समझाया,
मत करना स्वीकार यदि लड़की होने से धमकाया ।
अपने जीवन की सैली को सदा स्वछंद हो जीना,
लड़का यदि कुलभूषण होता तो लड़की होत नगीना।
इतनी काबिल तुम्हें बनाया अपने नाम की पहचान,
अपनी छोटी सोच न करना कभी नहीं होगा अपमान।
सदा मैं गर्वित होता रहता गढ़ता हूं बेटी की शान,
बता रहा इस बाप को अपनी आकांक्षा पर गुमान।
बेटी को यही सिखाता प्रभु सर्वत्र साथ रहता है,
कोई नहीं अकेला जग में बीपी ऐसा ही कहता है।
आत्म शक्ति से बढ़कर कोई भी शक्ति नहीं होती है,
आत्म शक्ति के बल पर ही जग में प्रगति होती है।
लड़का या लड़की होने का कोई फर्क नहीं पड़ता है,
लड़का या लड़की हो बुद्धि विवेक से आगे बढ़ता है।
-बीपी सिंह यादव
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