जग में अपनों का जीवन---
जग में स्वार्थ सिद्धि से ग्रसित अपनों का नाता है,
जलती शमा से ही पतंगे का प्यार का नाता है l
शमा के बुझ जाने पर पतंगा पास नहीं होता है,
तेरे जलने से ही अपनों का जीवन रोशन होता है l
खुद कष्टों में होने पर कोई आंसू नहीं पोछता है,
स्वार्थ सिद्ध होने के बाद कोई भी नहीं सोचता है l
जीवन का परीक्षा पत्र खुद ही हल करना होता है,
दूसरों से अपेक्षा करने वाला तो जग में रोता है l
जीवन की मुश्किलों का हल खुद करना होता है,
जमाना मुश्किलों का मात्र दर्शक दीर्घा होता है l
कष्टों में फंसे होने पर जमाना केवल मुस्कुराता है,
कोई भी सहारा नहीं देता बस केवल ठुकराता है l
जीवन तो एक दरिया जिसमें बहते ही जाना है ,
सांसों के रुकते ही परमधाम में ही ठिकाना है l
जीवन की दरिया में तो कभी लहरों भी आतीं हैं,
लहरें तेरे जीवन की शक्ति को सदा आजमाती हैं l
दरिया में चलना चाहे तो मुर्दा बनकर बहना है,
छुपा के अपने सारे गमों को कुछ न कहना है l
इस प्रकार से जीवन की यात्रा सफलता पायेगी,
इन्हीं शब्दों के साथ बीपी की कलम रुक जाएगी l
- बीपी सिंह यादव
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