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दर्शन शास्त्र की पुस्तकें अपने भाई से मिल गई

                
                                                         
                            अध्यापक अध्याय ज्ञान के जोड़े,
                                                                 
                            
अज्ञान के कपाट खोले
अव्यस्थित समाज को आकार दे,
रहस्य प्रकृति के उजागर करे,
टीचर्स डे,
डॉक्टर राधाकृष्णन के जन्मदिन के
उपलक्ष्य में मनाते,
जीवन की डगर कठिन,
गणितज्ञ बनना चाहते,
पुस्तक खरीद नहीं सकते,
दर्शन शास्त्र की पुस्तकें अपने भाई से मिल गई,
दर्शन शास्त्र पढ़ बन गए अध्यापक दर्शन के
काम याबी के सोपान चढ़ते गए,
अंग्रेजी सरकार ने नाइटहुड की उपाधि दी
भारत के दर्शन को विश्व पटल पर अंकित किया,
पुस्तकें लिखी,
सही अर्थों में शिक्षक विद्यार्थी का वार्तालाप पारदर्शी हो,
भारत ने भी पूर्ण सम्मान दिया,
भारत के प्रथम उप राष्ट्रपति,
द्वितीय राष्ट्रपति,
भारत रत्न ,पद्म श्री,पद्म विभूषण से सम्मानित,
नोबल प्राइज के लिए चयन किया,
किंतु मिल न सका,
मजबूरियां मजबूत बनाती,
सर्वपल्ली डॉक्टर राधाकृष्णन,
का जन्म दिन टीचर्स डे के रूप में मनाते,
सर्वश्रेष्ठ टीचर्स को सम्मानित करते,
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एक घंटा पहले

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