सोलह कलाओं वाले कृष्ण
काल जई,
काल मंडराए कदम कदम पर,
कंस के कारागार में जन्मे,
षडयंत्र पूतना,
वध कर भयभीत किया कंस को,
बना शत्रु कृष्ण का,
वासुदेव यमुनापार चले गोकुल,
शेषनाग ने भीगने से बचाया,
उफनती यमुना स्पर्श कर हुई धन्य
सोलह कलाओं में निपुण ,
वश में कर लेते चराचर विश्व को,
बाललीला से मोहित किया,
ग्वालों संग गाय चराते,
माखन चुराते,
राधा संग रास रचाते,
बंसी बजाते
मयूर , गाय,चिड़िया,तोते ध्यानमग्न हो कृष्ण के पास बैठजाते ,
जन्माष्टमी आज भी जीवंत,
बच्चा बच्चा,कृष्ण राधा का रूप धर,
बाल लीला का प्रदर्शन करते,
खीरे में से जन्म होता,
पालना सजता,
झोंटा देते
दही हांडी,मांखन चुराते,नृत्य करते,
उपवास करते,
पाग़,खीर,कुट्टू के आटे के पकौड़े,
धनिया की पंजीरी बना भजन कर स्मरण करते,
घर घर झांकियां सजती,
मथुरा,वृंदावन, में तो पैर रखने की जगह नहीं,
फूल बंगला सजता,
कृष्ण एक उत्सव है,
गाय को स्पर्श किया,
हुआ देवों का वास,
मयूर में कान्हा की छवि उतर आई ,
जिस धरा पर जन्म लिया हुई पावन,
सारा भारत कान्हा का दीवाना,
भय पर विजय ही कान्हा का उद्देश्य,
हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की।
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