उड़ान ऊँची है मेरे सपनों की,
जीत अभी बाकी है मेरे अरमानों की।
हवाओं के रुख को अब मोड़ना है मुझे,
किस्मत की जंजीरों को तोड़ना है मुझे।
लोग कहते हैं कि यह सफर बहुत कठिन है,
पर नामुमकिन हर ख्वाब को सच करना है मुझे।
मंजिलें पुकारती हैं दूर आसमान से,
रिश्ता है मेरा अब तो हर इम्तिहान से।
तप रहा हूँ धूप में तो क्या हुआ मेरे दोस्त,
छाँव बनेगी कल मेरे इसी पसीने के निशान से।
रोशनी की तलाश में खुद दिया बन गया हूँ,
तितलियों के पीछे चलना कब का छोड़ दिया हूँ।
अब तो बाज़ की तरह आसमान नापना है,
चीर कर हर हद को नया मुकाम पाना है।
रात भर जागकर जो एक दीप जलाया है,
मैंने खुद अपनी किस्मत को नया मोड़ दिलाया है।
तूफानों की जिद थी जहाँ आंधियाँ चलाने की,
मैंने भी वहीं पर अपना आशियाना बनाया है।
लकीरों के भरोसे बैठना अब छोड़ दिया मैंने,
अपने हाथों से अपनी तकदीर को मोड़ दिया मैंने।
वक़्त चाहे कितना भी इम्तिहान ले मेरा,
हर मुश्किल को अपनी जीत से निचोड़ दिया मैंने।
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