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बस उंगलियों की हल्की सी सरगोशी बनकर।

                
                                                         
                            होंठों के मिलन से पहले,
                                                                 
                            
इश्क़ के इकरार से पहले,
एक छुअन थी जो ठहरी हुई थी,
झिझक की दहलीज़ पर खड़ी,
चुपचाप दिल का दरवाज़ा खटखटा रही थी।
तुम्हारा हाथ मेरे करीब था,
मगर इतना नहीं कि थाम सके,
और इतना दूर भी नहीं
कि उसकी गर्माहट महसूस न हो।
वो फ़ासला भी अजीब था।
फिर जाने-अनजाने में
उंगलियाँ एक-दूसरे से छू गईं।
दुनिया के लिए बस एक पल था,
पर मेरे भीतर
एक नया मौसम जन्म ले चुका था।
न कोई वादा हुआ,
न मोहब्बत का इज़हार,
बस त्वचा से त्वचा का स्पर्श था,
जो बिना शब्दों के
हज़ार बातें कह गया।
तुमने नज़रें झुका लीं,
मैंने मुस्कान छुपा ली,
पर उस एक पल की धड़कन
हम दोनों के दिलों में
देर तक गूँजती रही।
वो छुअन बहुत छोटी थी,
मगर उसका असर गहरा था।
आज भी यादों की किताब खोलूँ,
तो सबसे पहले वही पन्ना
अपनी खुशबू बिखेर देता है।
किसी आलिंगन से अधिक कोमल,
किसी चुंबन से अधिक सच्ची,
वो पहली छुअन थी,
जिसमें चाहत भी थी
और मासूमियत भी।
उस पल में झिझक भी थी,
और उम्मीद भी।
एक दिल पीछे हटना चाहता था,
दूसरा धीरे-धीरे
करीब आना सीख रहा था।
शायद हर प्रेम कहानी
यहीं से शुरू होती है,
जब दो हाथ अनजाने में मिलते हैं,
और दिल बिना आवाज़ किए
एक-दूसरे को अपना लेते हैं।
आज भी याद है मुझे,
वो पहली छुअन, पहला एहसास,
जब मोहब्बत ने दस्तक दी थी
बिना किसी शब्द, बिना किसी शोर के,
बस उंगलियों की हल्की सी सरगोशी बनकर।
 
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55 मिनट पहले

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