सुख सबका होता है, दुःख बस अपना होता है,
खुशियों में हर कोई अपना-सा लगता है।
दर्द की घड़ी में रिश्तों का सच दिख जाता है,
कौन अपना है, कौन पराया—सब समझ आता है।
इसलिए खुशी हो तो खुलकर मुस्कुराया करो,
दर्द हो तो चुपचाप उसे सह जाया करो।
खुशियों में शामिल होने को हर कोई तैयार है,
मगर दर्द में साथ खड़ा हो—ऐसा कहां कोई यार है।
- विजय बिंदास राजा
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