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इतना झूठ बोल पाती हो कैसे…

                
                                                         
                            मेरे होते हुए गैरों से,
                                                                 
                            
वफ़ा निभाती हो कैसे…
मेरी आँखों में देखकर भी,
इतने confidence से तुम
झूठ बोल पाती हो कैसे…

जिसे मेरी गैर-मौजूदगी में
अपना कहती हो तुम,
उसे मेरे सामने
गैर बताती हो कैसे…

मैंने तो तुम्हें दिल दिया था,
अपना समझकर…
तुम मेरा दिल तोड़कर,
मुझे ही गलत और
ख़ुद को सही बताती हो कैसे…
-विजय बिंदास राजा
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2 घंटे पहले

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