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हर चेहरे के पीछे छुपा किरदार सामने आएगा।

                
                                                         
                            धोखा कलयुग का प्रसाद है,
                                                                 
                            
बारी-बारी सबके साथ होगा…!

आज जो हँस रहा है, कल वो भी उदास होगा,
जिसे खुद पर गुरूर है, उसे भी किसी पर विश्वास होगा।

यहाँ कौन किसका है, ये वक्त बताएगा,
हर चेहरे के पीछे छुपा किरदार सामने आएगा।

आज जो बाँट रहा है दूसरों को दर्द,
कल वो भी अपने कर्मों का फल पाएगा!
-विजय बिंदास राजा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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