थर्राती ठंड में कोहरे की चादर से लिपटी।
मुस्कुराती,गुनगुनाती,मधुर संगीत सुनाती।
अपने बजूद पर इठलाते,शर्माती सी हुई।
नाजुक कली सी,खिलने को हुई।
किसी राजकुमार से मिलने को आतुर,
जैसे प्रेयसी कोई सजी हुई।
ओस की बूंदे कुछ बनी हुई कुछ ठनी हुई।
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