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अधूरे ख़्वाब

                
                                                         
                            कुछ अधूरे से ख़्वाब यूँ ही रह गए,
                                                                 
                            
वक्त बदलने पर जो खुद बदल गए।
जैसे अनगिनत तारों-सितारों की चमक,
झिलमिल जैसे अब हो गए।

कुछ अधूरे से ख़्वाब यूँ ही रह गए,
मेरी आँखों के सपने, सपने ही रह गए।
दिल के कोने में बैठे वो ख़्वाब,
बस केवल ख़्वाब ही बनकर रह गए।

कुछ अधूरे से ख़्वाब बस यूँ ही रह गए...!!
-विद्यानन्द राय
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2 घंटे पहले

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