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उसे ही तो यहां न्याय या अन्याय कहा जाता है ?

                
                                                         
                            ये वसन पहले से ही विदीर्ण है,
                                                                 
                            
ये विदीर्ण ही यहां सबको मिला है,
ये बस खुद को ढकने का प्रयास करता है,
ये अपने आप बढ़ता है, व ये अपने ही आप घटता है,
इसको किसी को काटने की जरूरत नहीं,
इसके पीछे कुछ भी नहीं छिपा है,
व नहीं इसके आगे,
हर तरह के कर्म में इसको पहले
परिभाषित करा जाता है,
इसको धोया जाता है, व इसको ही तो
यहां निचोड़ा जाता है,
जो बाद में बच जाता है,
उसे ही तो यहां न्याय या अन्याय कहा जाता है ?
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22 घंटे पहले

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