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इस धरती का महाविनाश हुआ है।

                
                                                         
                            धरती अब धृति तजने को है,
                                                                 
                            
अपनी धुरी से भी हटने को है,
इंसान इतना बहक गया कि,
यहां अब सबकुछ मिटने को है,
धरती अपने इसी गुण के कारण,
इस ब्रह्मांड की चाल को संभाले है,
ज्ञान, विज्ञान को संचारित करके,
मन की उत्कृष्टता को ढाले हुए है,
जितना हमने नहीं सहा, हमारा विनाश हुआ,
उससे भी ज्यादा और बढ़कर,
इस धरती का महाविनाश हुआ है।
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4 घंटे पहले

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