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शायद तुम्हें पाना नहीं, तुममें खोना ही प्रेम है।

                
                                                         
                            जिसके होने का न सोचा था,
                                                                 
                            
वो हो गया।

पहले नज़र मिली और दिल शर्मा गया,
एक नई तलाश शुरू हो गई—
एक हल्की-सी मुलाक़ात पाने की ,
या नज़र मिलने की।

क्या यही प्रेम है?

जब तुम पास आए,
तो साँस रुक गई, धड़कनें थम गईं।
नज़र झुक गई, पल भर के लिए
धरती रुक गई,
और जो नहीं होना था,
वो गलती हो गई।

क्या यही प्रेम है?

वह अजीब-सा एहसास था,
वह हवा जो दिल को छूकर निकली।
हर चीज़ नई लगने लगी,
हर जगह पसंद आने लगी।

क्या यही प्रेम है?

झूठी बातें सच्ची लगने लगीं,
सुलझी राहें उलझने लगीं।
यह एहसास समझ नहीं आ रहा था—
तो क्या जिसे समझा न जा सके,
वही प्रेम है?

जिसने सुकून तो नहीं दिया,
मगर दुख दे गया।
शायद यही प्रेम है।

तीन वर्ष साथ होकर भी
पास न होने का दुख,
आज भी तुम्हें महसूस करने का सुख,
कदम से कदम न मिल पाने का दुख।

क्या यही प्रेम है?

अफ़सोस इस बात का नहीं
कि हम एक न हुए,
दर्द इस बात का है
कि मैं प्रेम को समझने में
वर्षों लगा बैठी।

मैं कदम बढ़ा न सकी,
तुमने अपने बढ़ते कदम पीछे खींच लिए।
मैं अपने एहसास में उलझी रह गई,
और तुम किसी और के हो गए।

धन्यवाद, मेरी पहली मोहब्बत बनने के लिए।
तुमसे पहले न कोई आया था,
न कोई आया है,
और न कभी आएगा।

शायद तुम्हें पाना नहीं,
तुममें खोना ही प्रेम है।

वहाँ तुम नहीं,
यहाँ मैं नहीं—
हम ही प्रेम हैं।
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22 घंटे पहले

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