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बुलावा दोस्ती का

                
                                                         
                            घर आ गया हूं वापस तुम मिलने आ जाओ
                                                                 
                            
अनगिनत किस्से हैं बस सुनने आ जाओ
बेहिसाब गठरी बाँध ली है कहानियों की,
मनपसंद हो जो तुम्हें वो चुनने आ जाओ
आओगे अगर तो कोई बहाना संग लाना
हँसी और मस्ती के सब रंग लाना
वो स्कूल की छुट्टी,वो कॉलेज की मस्ती
टीचर की डांट पर जोर से खिलखिलाना
वो फर्जी सी लड़ाई ,और छीन कर खाना
जितना हो सके सब समेट लाना
देखो इस बार कोई बहाना ना बनाना
प्यार से बुलाया है चुपचाप आ जाना



 
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1 hour ago

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