पहले तो न जाने कितनों की ख़रोंच भी गवारा न थी,
फिर उनके लिए दिल में कोई जगह दोबारा न थी।
न जाने क्या हुआ है मुझे उस एक शख़्स से मिलने के बाद,
कि ख़ंजर भी उसी का है, और उससे कोई शिकायत किनारा न की।
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