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क्या लिखूँ

                
                                                         
                            एक रोज समझ नहीं आया क्या लिखूँ,
                                                                 
                            
"एक महिला की मजबूरी लिखूँ" या "समाज हैं ये जरूरी लिखूँ",

कानूनी हक लिखूँ या "बंधनों का सच" लिखूँ,
झूठी सच्चाई लिखूँ या अस्ल झूठ लिखूँ,

"समाज के दिये हालात" लिखूँ या "इस दौर की महिला"की बात लिखूँ,

जहाँ "समानता का होता ढोंग" लिखूँ या "बढ़ते शोषण से जूझती औरत" की बात लिखूँ या उसके "हालात"लिखूं,

आज की "सक्षम नारी की फरियाद" लिखूँ,
या इस "पर्दे को हटाकर" सारी बात लिखूँ,

लिखने से याद आया,
"पहले महिला की मजबूरी लिखूँ या पहले समाज हैं ये जरूरी लिखूँ",
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एक घंटा पहले

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