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पतझड़ में भी सावन

                
                                                         
                            पतझड़ में भी सावन
                                                                 
                            
आंखों से मेरे बरसा है
टूटकर जब भी
तुमने मुझे चाहा है....

-वंदना अग्रवाल निराली
 
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5 वर्ष पहले

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