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गांव हमार

                
                                                         
                            गांव हमार
                                                                 
                            

आईं गंउवा लखीं हमार।
कटहर बड़हर गाछ गम्हार।
खेती-बाड़ी अउर ईनार।
गईआ-बाछी घर पिछुआर।

बरहम बाबा-काली माई।
सती दाई-जोगनी मांएई।
छठी मईआ-छोटका पूल।
बगल में एकरा छोट स्कूल।

दर-दलान आ खेत-खलिहान।
ईंहवे होखे सांझ-बिहान ।
कुछ दूरी पर मोड़-बाजार ।
लगे शनिचर भीड़ अपार।

वातावरण सुखद हरियाली।
फल से लदरल डाली-डाली।
ठण्ढी हवा बहे सुखदाई।
उठीं सबेरे देखीं भाई।

कोयल कूके चिरई बोले।
कनवा में ज्यूं मिसिरी घोलें।
प्रात बेला में जगे किसान ।
मेहनत से उपजावे धान।

गेहूं, रागी, गन्ना, छोला ।
दलहन अलसी इहवें होला
गांव कीमती हमर बड़ा बा।
एहि प मानी देश खड़ा बा।
-'प्यासा'
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40 मिनट पहले

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