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मैं समझ ही गया जब खुली खिड़कियां

                
                                                         
                            तेरे माथे पे बिंदी लगी रह गई,
                                                                 
                            
चाँद की रोशनी में कमी रह गई |

फूल अब भी हैं ताज़ा जो तूने दिए,
तेरे हाथों की इनमें नमी रह गई |

मेरा कमरा था ख़ुश तेरे जाने से भी,
जाने के बाद तेरी कमी रह गई |

वक़्त ठहरा हुआ है जहां में अभी,
तेरे हाथों से शायद घड़ी गिर गई |

मैं समझ ही गया जब खुली खिड़कियां,
तेरे कमरे की खिड़की खुली रह गई |

लोगों ने अनसुना कर दिया बातों को,
जिन भी बातों में तेरी कमी रह गई |

लड़ रहे हैं पड़ोसी ज़मीं के लिए,
मेरे हिस्से में तेरी ज़मीं रह गई |

राजनीतिक दलों में गई जबसे तू,
बाग़ियों की वहाँ पे कमी हो गई |
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एक दिन पहले

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